अरिहंत जय जय सिद्ध प्रभु जय जय

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

अरिहंत जय जय सिद्ध प्रभु जय जय ।

साधू जीवन जय जय जैन धर्म जय जय ॥

अरिहंत मंगल सिद्ध प्रभु मंगल ।

साधू जीवन मंगल, जैन धर्म मंगल ॥

अरिहंत उत्तम सिद्ध प्रभु उत्तम ।

साधू जीवन उत्तम, जैन धर्म उत्तम ॥

अरिहंत शरणम सिद्ध प्रभु शरणम ।

साधू जीवन शरणम, जैन धर्म शरणम ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।