जीवन की घाटी में सोना है माटी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जीवन की घाटी में सोना है माटी,

अगर मन ये प्रीतम न गाये मधुर गीतम,

रामम रामम,

जीवन की घाटी में सोना है माटी,

अगर मन ये प्रीतम न गाये मधुर गीतम,

रामम रामम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम...

जीवन की घाटी में सोना है माटी,

अगर मन ये प्रीतम न गाये मधुर गीतम,

रामम रामम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम....

अविवेकी मन ये स्वयं में ही उलझा,

काँटों को इसने सरा फूल समझा,

आँखों के होते हुये खाये ठोकर,

दुःख में प्रभु तुम को दिखलाये रोकर,

प्रीती में तेरी न आँखे हुयी नम,

मगर मन ये प्रीतम भरे भक्ति का दम,

रामम रामम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम....

सपनों के झूले में मन कैसा झूला,

सुख रूप अपने प्रभु को ही भुला,

माया के तूफ़ान तिनके सा जीवन,

मज़बूर उड़ता रहा है ये हर क्षण,

सूरज के बिन कैसे कट पायेगा तम,

मगर मन ये प्रीतम करे व्यर्थ ही श्रम,

रामम रामम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम,

राम जय जय राम जय जय राम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।