देखो मेरी मैया के नज़ारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गाँव गली सब चमक रही है,

मैया की किरपा बरस रही है,

गाँव गली सब चमक रही है,

मैया की किरपा बरस रही है,

देखो मेरी मैया के नज़ारे,

चमक रहे आँखों के तारे,

देखो मेरी मैया के नज़ारे,

चमक रहे आँखों के तारे....

चेत्र कुवार में मैया रानी,

चल के भगत घर आये महारानी,

भगतो के भाग्य सँवारे,

देखो जी मेरे माँ के नज़ारे,

देखो जी मेरे माँ के नज़ारे,

चमक रहे आँखों के तारे.....

दादुर मोर पपीह बोले,

नाचे मयूर मगन मन डोले,

नाचे हैं भक्त देखो सारे,

देखो जी मेरे माँ के नज़ारे,

देखो जी मेरे माँ के नज़ारे

चमक रहे आँखों के तारे.....

वेद पुराण तेरे गुण गाये,

आज ‘सत्येन्द्र’ भी महिमा गाये,

‘देवेन्द्र’ को माँ पार उतारे,

देखो जी मेरे माँ के नज़ारे,

देखो जी मेरे माँ के नज़ारे,

चमक रहे आँखों के तारे……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।