क्यों चिंता करता बेकार

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॥ पावन पाठ ॥

क्यों चिंता करता बेकार, द्वारे पे तेरे खडो है दातार,

देगो चुगेरो है, जाने चोंच दई।।

धन धान मान दियो है और सुंदर दई देह नर की,

जाने गेह नेह दियो है, वो ही चिंता करेगो या घर की,

काहे करे दुनिया में, तू झूंठो बखेड़ो है, जाने चोंच दई।।

नौ मास के गर्भ में जिंदा कैसे रहो कहाँ से खायो,

जब दांत नही थे तेरे मुख में, दूध अमृत सो तोकूं पिलायो,

सब जग को रखवारो, तेरो सहारा है, जाने चोंच दई।।

कहा सोच को बनेगो, काहे चिंता में तन को जलाने,

वाके आगे ना तेरी चलेगी, वो तो सारे जगत कूं नचाते,

पूरण को पूरण है, ना कछू तेरो है, जाने चोंच दई।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।