आया मिग्सर महोत्सव आया

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - यम्मा यम्मा यम्मा यम्मा

आया आया, आया आया, मिग्सर महोत्सव आया,

आओ चले चुरुधाम सभी, बाबोसा ने है बुलाया,

मेला आया मेला आया, खुशियां हजारों लाया,

आओ चले चुरुधाम सभी, बाबोसा ने है बुलाया......

जिस पल का था, हमें इंतजार,

शुभ दिन वो आया है द्वार,

मिग्सर की पाँचम, लाई है बहार,

छाई है खुशियां अपार,

भक्तों की टोली आयी झूमकर,

देखो बाबोसा के द्वार,

सुनकर हम बच्चो की पुकार,

मंजू बाईसा ने दर्श कराया,

आया आया, आया आया, मिग्सर महोत्सव आया,

आओ चले चुरुधाम सभी, बाबोसा ने है बुलाया......

दीवाने जो है बाबोसा के.

वो तो आयेंगे जरूर,

दरबार दिलबर चुरू धाम का,

जग में बड़ा मशहूर,

सज धजकर जहा बैठे बाबोसा,

मुख पे है बरसे नूर,

भक्तो के संग गाता जाये शैलू ,

बाबोसा ने है बुलाया,

आया आया, आया आया, मिग्सर महोत्सव आया,

आओ चले चुरुधाम सभी, बाबोसा ने है बुलाया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।