मेरे शंकरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शंभू महादेवा जय जय शंकरा,

शंभू महादेवा जय जय शंकरा,

शंभू महादेवा जय जय शंकरा,

शंभू महादेवा जय जय शंकरा………

ओ मेरेया शंकरा ओ,

मौन में बैठा है तू,

ओ तेरे दर्शन को,

ओ तेरे दर्शन को,

तरसे मेरी रूह,

ओ बैठा कैलाश में तू,

अनंत आकाश में तू,

ओ बैठा कैलाश में तू ,

अनंत आकाश में तू,

ओ पग पग मैं चलिया,

ओ पग पग मैं चलिया,

मिलने की आस में हूं,

ओ मेरे शंकरा ओ,

मौन में बैठा है तू………

ओ तू है तो मैं हूं

तुझ बिन मैं क्या हूं

ओ तू है तो मैं हूं

तुझ बिन मैं क्या हूं

ओ मन बैरागी हुआ

ओ मन बैरागी हुआ

तेरी लगन में हूं

मेरेया शंकरा ओ,

मौन में बैठा है तू………

ओ मेरी डोर बंधी

मैं तुझ में समा रहा हूं

ओ मेरी डोर बंधी

मैं तुझ में समा रहा हूं

ओ सांसों की माला में

ओ सांसों की माला में

तेरा ही नाम जपू

मेरेया शंकरा ओ,

मौन में बैठा है तू……..

ओ मतलब दे रिश्ते,

तेरी दुनिया में कैसे रहूं,

ओ मतलब दे रिश्ते,

तेरी दुनिया में कैसे रहूं,

ओ आँउ जब मिलने,

मैं आऊँ जब मिलने,

शरण में लेना तू ,

मेरेया शंकरा ओ,

मौन में बैठा है तू……….

जग को तारण वाला ओ,

मेरा भोला भंडारी,

जग को तारण वाला ओ,

मेरा भोला भंडारी,

कष्ट मिटाने वाला ओ,

मेरा भोला भंडारी,

कष्ट मिटाने वाला ओ,

मेरा भोला भंडारी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।