अरुनोदय की पावन बेला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अरुनोदय की पावन बेला पर,

मंगल मन हो जाये,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये॥

गोकुल ग्वारिन दधि बिलोवे,

आवो श्याम पुकारे,

दर्श दिखावो माखन खावो,

दर्श दिखावो माखन खावो,

जाके कहाँ छुपा रे,

ओ मतवारी श्याम तिहारी,

गोपी तुझे बुलाये,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये,

अरुनोदय की पावन बेला पर,

मंगल मन हो जाये,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये॥

तान सुनी जिसने मुरली की,

उसका भाग्य है जागा,

तान सुनी जिसने मुरली की,

उसका भाग्य है जागा,

तोड़ के झूठे नाते जग क,

हरी चरनन में लागा,

गैया ग्वाले झूम उठे है,

यमुना भी लहराए,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये,

अरुनोदय की पावन बेला पर,

मंगल मन हो जाये,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये॥

डाल डाल पर पंछी चहके,

कर नाम का सुमिरन,

मंदिर मंदिर घंटी बाजे,

मंदिर मंदिर घंटी बाजे,

ओ नारायण अर्जुन,

श्याम कलश है अमृत जल का,

मन माहि चल पाये,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये,

अरुनोदय की पावन बेला पर,

मंगल मन हो जाये,

ऐ प्रभात की बेला कान्हा,

तोरी मधुर सुनाये,

तोरी मधुर सुनाये॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।