जय जय मंगलमूर्ति की

नरेन्द्र चंचल
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जय जय गणपति बप्पा

जय जय गणपति बप्पा

जय जय मंगलमूर्ति की मन से बोलिये

गणपति बप्पा मोरया मंगलमूर्ति मोरया |

जय जय मंगलमूर्ति की मन से बोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये |

जय जय मंगलमूर्ति की मन से बोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये |

जय जय गणपति बप्पा

जय जय गणपति बप्पा.....

भक्तों का रखवाला है ये चारभुजा धारी

इसके पावन चरणों में है झुकती दुनिया सारी

झुकती दुनिया सारी झुकती दुनिया सारी |

गजानन भगवन के दर की जो भी करेंगे सेवा

गौरीनंदन उनको देंगे साँचे सुख का मेवा

साँचे सुख का मेवा साँचे सुख का मेवा |

भक्ति और भावना की सुधा घोलिये

गणपति बप्पा मोरया मंगलमूर्ति मोरया |

भक्ति और भावना की सुधा घोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये ||

विघ्न विनाशक एक दन्त का नाम बड़ा सुखदायी

शरणागत के दुखभंजन के सुख की दौलत पाई

सुख की दौलत पाई सुख की दौलत पाई |

मूषकबाहु पे चढ़के ये तीन लोक में घूमें

पग पग गति की अनुपम धूलि सूरज चंदा चूमे

सूरज चंदा चूमे सूरज चंदा चूमे |

कभी अपने मन की भी आँखे खोलिये

गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया |

कभी अपने मन की भी आँखे खोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये ||

शिव के राजकुँवर की करलो सच्चे मन से पूजा

तीन तरफ जग की सृष्टि में और नहीं है दूजा |

और नहीं है दूजा और नहीं है दूजा |

रिद्धि सिद्धि का ये स्वामी |

दया की दृष्टिवाले

सुख सम्पदा वहाँ पे बरसे उड़ते बादल काले

उड़ते बादल काले उड़ते बादल काले |

वरष के तराज़ू में न इसे तोलिये

गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया |

वरष के तराज़ू में न इसे तोलिये |

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये |

जय जय मंगलमूर्ति की मन से बोलिये

जय हो ||

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

गणपति के भक्तों न कभी भी डोलिये

जय जय गणपति बप्पा

जय जय गणपति बप्पा

जय जय गणपति बप्पा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।