मेरी माँ संतोषी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अपनों को बुलाती माँ,

सपनों को सजाती माँ,

अपनों को बुलाती माँ,

सपनों को सजाती माँ,

दुःखियों को हसाती माँ,

मेरी माँ संतोषी,

तेरी जय जय कार संतोषी माँ,

करू बारम्बार संतोषी माँ.....

संतोष करना सभी को सिखाये

संतोषी ही तो परम सुख पाए

सब पे रखे अपने दृष्टि दया की

दीन दुखी को गले से लगाये

ममता सब पे लुटाती माँ

सपनों को सजाती माँ,

दुःखियों को हसाती माँ,

मेरी माँ संतोषी,

तेरी जय जय कार संतोषी माँ,

करू बारम्बार संतोषी माँ.....

जब भी माँ के द्वारे पे आये,

ख़ाली हाथ ओ कभी न जाए,

आस किसी की टूटे कभी न,

जीवन में सारी सफलता ओ पाये,

राह सब को दिखाती माँ,

सपनों को सजाती माँ,

दुःखियों को हसाती माँ,

मेरी माँ संतोषी,

तेरी जय जय कार संतोषी माँ,

करू बारम्बार संतोषी माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।