दुनिया की भीड़ में क्यों खो रहा

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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया की भीड़ में क्यों खो रहा,

मिलेगा कुछ भी ना फल जो बो रहा,

तू आजा घर लौट आ,

आ बेटे घर लौट आ...

मैं ढूँढू उस भेड़ को जो खो गयी,

गुनाहों की जेल में बंद हो गयी,

तू आजा घर लौट आ,

आ बेटे घर लौट आ....

गुनाहों में था अब तलक, तू जो धसा,

मकड़ी के जाल मे था जो फंसा,

तू आजा घर लौट आ,

आ बेटे घर लौट आ....

तू आँखे आब खोल कर सब जाँच ले,

तू सच और झूठ को अब माप ले,

तू आजा घर लौट आ,

आ बेटे घर लौट आ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।