बिनती सुनले येशु प्यारे

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॥ पावन पाठ ॥

बिनती सुनले येशु प्यारे,

मोरे संग रहो महाराज,

अब तुम राखो मोरी लाज....

बिनती करूं तुमसे केर जोरी,

अब तुम बिनती सुनलो मोरी,

मोहे आसा लग रही तोरी,

मोहे दरस दिखा दो आज,

बिनती सुनो मोरी महाराज,

प्रभु तुम राखो मोरी लाज...

आपका मैं शैदा कहलाऊँ,

आस लगी तोरे दर्शन पाऊँ,

युग युग आपका मई गुण गाऊँ,

मेरे गरीब नवाज़,

बिनती सुनो मोरी महाराज,

प्रभु तुम राखो मोरी लाज....

तुम हो हमारे नैनो के तारे,

मन के प्यारे दिल के दुलारे,

तुम ही हमारे तारण हारे,

हमारे तुम सर-ताज,

अब तुम राखो मोरी लाज......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।