मेरे सतगुरु नानक प्यारे

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु नानक प्यारे,

तन मन तोहे सौंप दिया रे,

मेरे सतगुरु नानक प्यारे,

तन मन तोहे सौंप दिया रे,

तेरे जैसा मेहरबाँ,

दूजा कोई है कहाँ,

तेरे जैसा मेहरबाँ,

दूजा कोई है कहाँ,

मेरे सतगुरु नानक प्यारे......

ज़िन्दगी को मिला है तेरा आसरा आसरा,

ज़िन्दगी को मिला है तेरा आसरा आसरा,

क्यों न हरदम करूँ शुक्रिया शुक्रिया शुक्रिया,

सिखलाई है सदा, तूने जीने की अदा,

तूने ही जनम हैं सँवारे,

तेरे जैसा मेहरबाँ,

दूजा कोई है कहाँ,

मेरे सतगुरु नानक प्यारे......

तेरी वाणी पे जो भी चला प्रेम से प्रेम से,

तेरी वाणी पे जो भी चला प्रेम से प्रेम से,

उसको रब का दरस है मिला प्रेम से प्रेम से,

तेरे शबदों पे जो, चलता है उसको,

मिलते हैं सदा सुख सारे,

तेरे जैसा मेहरबाँ,

दूजा कोई है कहाँ,

मेरे सतगुरु नानक प्यारे......

अंध विशवास के थे अंधेरे घने थे घने,

अंध विशवास के थे अंधेरे घने थे घने,

टिक न पाए जो पल भर तेरे सामने सामने,

पड़े चरण जहाँ, जग में वहाँ वहाँ,

सच के फैले उजियारे,

तेरे जैसा मेहरबाँ,

दूजा कोई है कहाँ,

मेरे सतगुरु नानक प्यारे,

तन मन तोहे सौंप दिया रे,

तेरे जैसा मेहरबाँ,

दूजा कोई है कहाँ,

मेरे सतगुरु नानक प्यारे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।