फिर ना मिले रे ऐसा समय सुहाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे,

ऐसा समय सुहाना,

ओ मन मेरे जाग सवेरे प्रभु का दर्शन पाना,

प्रभु का दर्शन पाना,

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे।

प्रभु दर्शन से होए पुनीता,

प्रभु दर्शन से होए पुनीता,

जनम सफल कर ले मन मीता,

प्रभु दर्शन से होए पुनीता,

जनम सफल कर ले मन मीता,

समय सुनेहरा कभी ना ठहरा,

समय सुनेहरा कभी ना ठहरा,

फिर होगा पछताना,

ओ मन मेरे जाग सवेरे प्रभु का दर्शन पाना,

प्रभु का दर्शन पाना,

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे।

नर तन पाके क्या तू करता,

नश्वर धन से झोली भरता,

नर तन पाके क्या तू करता,

नश्वर धन से झोली भरता,

मन समझा ले ओ मतवाले,

मन समझा ले ओ मतवाले,

छोड़ यूंही भरमाना,

ओ मन मेरे जाग सवेरे प्रभु का दर्शन पाना,

प्रभु का दर्शन पाना,

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे।

मुश्किल से जग माया पावे,

मुश्किल से जग माया पावे,

प्रभु तेरा भीतर मुस्कावे,

मुश्किल से जग माया पावे,

प्रभु तेरा भीतर मुस्कावे,

वो अविनाशी सब सुख राशि,

वो अविनाशी सब सुख राशि,

बन उसका दीवाना,

ओ मन मेरे जाग सवेरे प्रभु का दर्शन पाना,

प्रभु का दर्शन पाना,

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे।

जो आया सो एक दिन जाये,

ये सच्चाई समझ ना आये,

जो आया सो एक दिन जाये ये सच्चाई समझ ना आये,

तज मनमानी शरणौ हो प्राणी,

तज मनमानी शरणौ हो प्राणी,

साचा हरी ठिकाना,

ओ मन मेरे जाग सवेरे प्रभु का दर्शन पाना,

प्रभु का दर्शन पाना,

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे,

ऐसा समय सुहाना,

ओ मन मेरे जाग सवेरे प्रभु का दर्शन पाना,

प्रभु का दर्शन पाना,

फिर ना मिले रे,

फिर ना मिले रे........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।