साईं महादानी हैं साईं महादानी

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॥ पावन पाठ ॥

साईं महादानी हैं साईं महादानी,

रख ले मुझे चरणों में तेरी मेहरबानी,

हां साईं महादानी हैं साईं महादानी,

रख ले मुझे चरणों में तेरी मेहरबानी ||

तू ही आस मेरी तू ही प्यास मेरी,

तू ही आस मेरी तू ही प्यास मेरी,

मेरी साँसों पे तेरी हो हुक्मरानी,

हां साईं महादानी है साईं महादानी,

सिर पे मेरे हाथ रख तेरी मेहरबानी,

मेरी आत्मा भी तू - परमात्मा भी तू,

हो मेरी आत्मा भी तू -परमात्मा भी तू,

तू है सबसे निराला -तेरा कोई ना स्वामी,

हां साईं महादानी है साईं महादानी,

रख ले मुझे चरणों में तेरी मेहरबानी ||

मेरी तो आन है तू ही मेरी तो शान है तू ही,

मेरी खुशियां मेरे ज़ज्बे मेरे अरमान है तू ही,

मेरी पूजा की थाली तू सुबह पावन निराली तू,

रहे तू चाहे शिरडी में रहे पूजा ही शिरडी में सारी दुनिया कव्वाली तू ||

हो फूलों तारों पर भी-चाँद तारों पर भी,

फूलों तारों पर भी-चाँद तारों पर भी,

निगाह रहती तुम्हारी है कल्याणी,

हां साईं महादानी हें साईं महादानी,

रख ले मुझे चरणों में तेरी मेहरबानी ||

मुझे वर देदे भक्ति का मुझे जर देदे भक्ति का,

ये चोला साफ़ हो जाए मुझे दर देदे भक्ति का,

निगाहों में मुझे रख ले पनाहों में मुझे रख ले,

तू अपने आने -जाने की ही राहों में मुझे रख ले,

ये बेडा पार कर दे मेरा उद्धार कर दे,

हो बेडा पार कर दे मेरा उद्धार कर दे,

कोई दुनिया में तुझसा न बलिदानी,

हो साईं महादानी हैं साईं महादानी,

रख ले मुझे चरणों में तेरी मेहरबानी,

हां साईं महादानी हें साईं महादानी,

रख ले मुझे चरणों में तेरी मेहरबानी,

तू ही आस मेरी तू ही प्यास मेरी,

मेरी आत्मा भी तू परमात्मा भी तू,

मेरी साँसों पे तेरी हो तेरी हुक्मरानी,

हां साईं महादानी है साईं महादानी,

हां साईं महादानी है साईं महादानी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।