नवरात्रि आयी आओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये,

ओ जयकारा मैया का करते हुए,

वैष्णो देवी माँ के दर पे जाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये।

गुलाल संग उड़े रंग कई हवाओ में,

गुलाल संग उड़े रंग कई हवाओ में,

उमंग छाया हुआ आज हर दिशाओ में,

उमंग छाया हुआ आज हर दिशाओ में,

महकते फूल झरे बेशुमार राहों में,

चमक है एक अनोखिसी हर निगाहों में,

चमक है एक अनोखिसी हर निगाहों में,

भवन की राह पे देखो चला ये मेला है,

करीब आ रही माँ से मिलन की बेला है,

पुकारे माँ बांहे फैला..

हम हर कदम पर माँ की इबादत करते चले,

हम हर कदम पर माँ की इबादत करते चले,

ओ जयकारा मैया का करते हुए

वैष्णो देवी माँ के दर पे जाये

नवरात्रि आयी आओ

चलो हम नाचे गाये

नवरात्रि आयी आओ

चलो हम नाचे गाये।

नगाड़े झांझ मंजीरे बजाते झूमेंगे,

नगाड़े झांझ मंजीरे बजाते झूमेंगे,

पहुंच के भवन में मैया के पाव चूमेंगे,

पहुंच के भवन में मैया के पाव चूमेंगे,

सलोनी मूर्ति मैया की हम निहारेंगे,

वहाँ पे आरती मैया की हम उतारेंगे,

वहाँ पे आरती मैया की हम उतारेंगे,

हो रात चाहे के दिन हो कदम बढ़ायेंगे,

जो साथ लाये चढ़ावा उसे चढ़ायेंगे,

चलो दुआ पाये माँ से..

करवाये कीर्तन मिल के माँ की हम जय जय करे,

करवाये कीर्तन मिल के माँ की हम जय जय करे,

ओ जयकारा मैया का करते हुए,

वैष्णो देवी माँ के दर पे जाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये।

हमारी मन्नतें पूरी करेगी मैया ही,

हमारी मन्नतें पूरी करेगी मैया ही,

है खाली झोलिया अपनी भरेगी मैया ही,

है खाली झोलिया अपनी भरेगी मैया ही,

तेरे करम की बदौलत मिला है सब कुछ ही,

मिला वो माँगा जो हमने ना चाहे अब कुछ भी,

मिला वो माँगा जो हमने ना चाहे अब कुछ भी,

बनाया हमको है इंसान ये भी क्या कम है,

जो करती हम पे है एहसान ये भी क्या कम है,

रखो दया ये ही चाहे..

इंसानियत है सच्चा धरम ये हम सीख ले,

इंसानियत है सच्चा धरम ये हम सीख ले,

ओ वैष्णो देवी माँ के चरणों में जा,

श्रद्धा के फूलो की माला धरे,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये,

नवरात्रि आयी आओ,

चलो हम नाचे गाये।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।