बंसी बाजी रे जमुना की ओर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो,

बंसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो,

बोले कोयलिया नाच रहे मोर,

कान्हा ने आज रास रचायो,

बँसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो॥

ढोल पखावज चंग मिरदंग बाजे,

राधा रंगीली श्याम सुन्दर संग नाचे,

तीनों लोकों में मच गया शोर,

कान्हा ने महारास रचायो,

बँसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो॥

मधुवन में सतरंगी रंग आज बरसे,

उतरे सितारें धरा पे अम्बर से,

चांदनी खींचे मनवा की डोर,

कान्हा ने महारास रचायो,

बँसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो॥

आये झोंका मंद मंद बहकी पवन का,

बिखरी सुगंध महके कण कण मधुवन का,

जमुना मैया का मन ले हिलोर,

कान्हा ने महारास रचायो,

बँसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो॥

प्यारी जुगल छवि छटा बांकी बांकी,

अध्बुद्ध नज़ारा मनोहारी झांकी,

एक चंदा तो दूजा चकोर,

कान्हा ने महारास रचायो,

बँसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो॥

बंसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो,

बंसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो,

बोले कोयलिया नाच रहे मोर,

कान्हा ने आज रास रचायो,

बँसी बाजी रे जमुना की ओर,

कान्हा ने आज रास रचायो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।