सब दरवाजे बन्द पए सी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सब दरवाजे बन्द पए सी खुली सी इक मौरी

मै औथो दी आ गई नी दातिए घर वालिया तौ चोरी

घर वाले ता रोकन मैनू रोकन बाहर वाले

अन्दर बैठी नाम जपेन्दी बाहरो ला गए ताले

तेरी कृपा दे नाल दातिए खुली सी इक मोरी

मैं औथो दी आ गई नी दातिए घर वालिया तो चोरी

तेरी मेरी प्रीत पुरानी ए दुनिया की जाने

तेरे दर ते ओन दी खातिर करदी रोज बहाने

तेरा दर मै छडना नहीओ ना कर जोरा जोरी

मैं औथो दी आ गई नी दातिए घर वालिया तो चोरी

नाम तेरे दा गहना पाया छडके छापा छल्ले

जे दाती तू दर्श दिखा दे हो जाए बल्ले बल्ले

तेरी मेरी प्रीत दातिए जीवे चाँद चकौरी

मै औथो दी आ गई नी दातिए घर वालिया तो चोरी

दासी नित्त सुनावे दुखडे भेटा राही गाके

तू माँ मेरी शेरावाली कष्ट मिटा दे आके

देखी किधरे टूट ना जावे ए स्वासा दी डोरी

मै औथो दी आ गई नी दातिए घर वालिया तो चोरी

uploaded by :- आशा (बरनाला)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।