मत्था टेक लो जी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मत्था टेक लो जी अज मत्था टेक लो,

दाता दे चरणा च मत्था टेक लो,

सोणा सोणा गुरु का दर्श कर लो,

भागा वाले चरणा च मत्था टेक लो,

मत्था टेक लो जी अज मत्था टेक लो,

दाता दे चरणा च मत्था टेक लो॥

जेहड़ी मत्था टेक दे न पैन मजबूरियां,

दिल दिया आसा सदा होंदिया ने पुरिया,

सच्चे दिल नाल तुसी आके वेख लो,

सोणा सोणा गुरु का दर्श कर लो,

मत्था टेक लो जी अज मत्था टेक लो,

दाता दे चरणा च मत्था टेक लो॥

भगत मत्था टेक देने, होंदे सारे काम ने,

दाता ने सवारे कम किते कई कमाल वे,

धयानु वांगु नच के मना के वेख लो,

सोणा सोणा गुरु का दर्श कर लो,

मत्था टेक लो जी अज मत्था टेक लो,

दाता दे चरणा च मत्था टेक लो॥

दास जदो चरणा च सिर नू झुकांदे ने,

मेहरा वाली कृपा वाली झोली भरी पोंदे ने,

दाता जी दा सोणा सोणा मुख वेख लो,

भागा वाले चरणा च मत्था टेक लो,

मत्था टेक लो जी अज मत्था टेक लो,

दाता दे चरणा च मत्था टेक लो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।