देवनंदी गुरुदेव जय हो

पारंपरिक
महादेव भजन जैन भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर....-4

शीला देवीजी की आँख के तारे मेरे गुरुवर,

प्रेमचंद्रजीे के जो नन्दन, उनको वंदन,

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर॥

बालपन से संयम को धारे चले गुरुवर,

कुंथुसागरजी से ले दीक्षा, चले शिवपथपर,

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर॥

सारश्वत आचार्य कहाये मेरे गुरुवर,

परम तपस्वी बड़े उदार, गुरुदेव हमारे,

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर॥

तीर्थो का उद्धार कराए मेरे गुरुवर,

ज्ञानयोगी और प्रज्ञाश्रमण, करे आत्म रमण,

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर॥

करुणा और वात्सल्य के दाता मेरे गुरुवर,

जिसके सर पर रख दे हाथ, सुख उसके साथ,

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर॥

णमोकार तीरथ के प्रणेता मेरे गुरुवर,

पद्मावती माँ का दरबार, बड़ा अतिशयकार,

देवनंदी गुरुदेव जय हो आचार्य प्रवर॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।