कुंडलपुर के बड़े बाबा की बड़ी निराली शान है

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॥ पावन पाठ ॥

कुंडलपुर के बड़े बाबा की बड़ी निराली शान है,

हो...यहाँ विराजे आदि प्रभु की प्रतिमा बड़ी विशाल है,

यहाँ विराजे आदि प्रभु की प्रतिमा बड़ी विशाल है,

हो.....वाह वाह क्या बात है बाबा जब साथ है॥

सिद्धो की इस पुण्य धरा पर बड़े बाबा का वास है,

सबसे ज्यादा विद्या गुरु का हुआ यही चौमास है,

कुंडलपुर की चूलगिरी को वंदन बारंबार है,

हो.....वाह वाह क्या बात है बाबा जब साथ है॥

कितने भी संकट हो हमको चाहे दिन या रात हो,

कैसा भय और कैसी चिंता बाबा जब तू साथ हो,

कुंडलपुर की चूलगिरी को वंदन बारंबार है,

हो.....वाह वाह क्या बात है बाबा जब साथ है॥

कुंडलपुर के बड़े बाबा की बड़ी निराली शान है,

हो...यहाँ विराजे आदि प्रभु की प्रतिमा बड़ी विशाल है,

यहाँ विराजे आदि प्रभु की प्रतिमा बड़ी विशाल है,

हो.....वाह वाह क्या बात है बाबा जब साथ है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।