मदन गोपाल दीन दयाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मदन गोपाल, दीन दयाल,

साँवरिया मेरो, प्यारो नन्द लाल ll

साँवरिया मेरो, प्यारों नन्द लाल ll

मदन गोपाल, दीन दयाल,,,,,,,,,,,

ओ नील कमल, ओ नील मणि,

नव नीरद नाथ हमारे l

जीभ बिचारी, अब भई बावरी,

यह तो तेरो नाम पुकारे ll

अँखियन से, ज्योति चली हाये,

यह तो तेरी बाट निहारे l

आ जा रे, अब मेरे साँवरिया,

आ जा रे,,, आ जा,

आ जा रे,,, अब तो आ जा,

आ जा रे,,, ओ मेरे साँवरिया,

ये प्राण रहें दुखियारे l

तुम बिन यह प्राण रहे दुखियारे,,,

मदन गोपाल, दीन दयाल,

साँवरिया मेरो, प्यारो नन्द लाल ll

साँवरिया मेरो, प्यारो नन्द लाल llll

आ जा रे,,, आ जा रे,,, साँवरिया l

आ जा रे,,, आ जा रे,,, xll-ll

साँवरिया मेरो, प्यारो नन्द लाल llll

मेरो प्यारो नन्द लाल llll

दीन बंधू दया, करूँणा करना llll

मदन गोपाल, दीन दयाल,

साँवरिया मेरो, प्यारो नन्द लाल ll

साँवरिया मेरो, प्यारो नन्द लाल llll

मेरो प्यारो नन्द लाल llllllllll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।