श्याम प्रभु की ज्योत

लखबीर सिंह लक्खा
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ॐ श्री श्याम देवाय नमः,

ॐ श्री श्याम देवायन नमः,

श्री श्याम प्रभु की जिस घर में,

हां ज्योत जगाई जाती है,

श्री श्याम, श्री श्याम,

जय श्री श्याम,

श्री श्याम प्रभु की जिस घर में,

हां ज्योत जगाई जाती है,

उस घर का भक्तो क्या कहना,

हर ख़ुशियाँ पाई जाती हैं......

जो रोज सवेरे उठ करके,

मेरे श्याम को शीश नवाते हैं,

जो नाम श्याम का लेकर के ही,

घर से बाहर जाते हैं,

ज्योति की भभूति श्रद्धा से,

ज्योति की भभूति श्रद्धा से,

माथेँ पे लगाई जाती है,

उस घर का भक्तो क्या कहना,

हर ख़ुशियाँ पाई जाती हैं.......

जिस घर में श्याम को भोग लगा,

भोजन को परोसा जाता है,

उस भोजन को अमृत समझो,

वो श्याम प्रसाद बन जाता है,

जहा भोजन के हर कोर में,

महिमा श्याम की गाई जाती है,

उस घर का भक्तो क्या कहना,

हर ख़ुशियाँ पाई जाती हैं.....

जिस के घर में श्री श्याम भजन,

सुनते है और सुनाते है,

जो श्याम प्रभु के चरणों में,

तन मन की सुध बिसराते है,

जिस के घर में माँ बच्चो को,

श्री श्याम श्री श्याम जपवाती है,

उस घर का भक्तो क्या कहना,

हर ख़ुशियाँ पाई जाती हैं.....

ऐसे प्रेमी के घर “बिन्नू”,

मेरे श्याम प्रभु बस जाते हैं,

उस घर परिवार पे “लख्खा” श्याम धणी,

सुख अमृत बरसाते है,

वो घर मंदिर बन जाये जहाँ,

फूलो सी खुशबु आती है,

उस घर का भक्तो क्या कहना,

हर ख़ुशियाँ पाई जाती हैं,

श्री श्याम प्रभु की जिस घर में,

हाँ यह ज्योत जगाई जाती है,

उस घर का भक्तो क्या कहना,

हर ख़ुशियाँ पाई जाती हैं.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।