रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये,

दस हाँ माँ असां केड़े छतर चुराये,

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये.......

ओह बन गये अज कडेंया दे बुटे,

ओह बन गये अज कडेंया दे बुटे,

जेडे फुल मैया असां हथा नाल लाये,

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये......

होर नु तां वडें मैया सुखा दे खजाने,

होर नु तां वडें मैया सुखा दे खजाने,

दुनिया दे सारे दुख मेरी झोली पाये,

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये......

तेरा दर छड के मै केड़े दर जांवा,

तेरा दर छड के मै केड़े दर जांवा,

दुखा वाला हाल मैया किस नु सुनांवा,

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये......

रो रो के मै तां मैया तेरे कोल पुछना,

रो रो के मै तां मैया तेरे कोल पुछना,

दुनिया दे विच मन्दे भाग क्यों बनाये,

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये......

रूसी ऐ तू साडे नाल क्यों मेरी माँये,

दस हाँ माँ असां केड़े छतर चुराये,

दस हाँ माँ असां केड़े छतर चुराये......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।