आँखो में हो आंसू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आँखो में हो आंसू और होठों पे हो माँ का नाम,

क्यों नही रीझेगीे मेरी माँ क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

करो भरोसा माँ पे बन जायेगें तेरे बिगड़े काम,

क्यों नही रीझेगी मेरी माँ क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

आँखो में हो आंसू और होठों पे हो मां का नाम....

अपने पापों पर पछताये जब भी तू रो देगा,

तेरा ईक ईक आंसू क्यो ना पापों को धो देगा,

फिर अम्बे माँ का दर्शन होगा क्या होगा ईनाम,

क्यों नही रीझेगी मेरी माँ,

क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

आँखो में हो आंसू और होठों पे मां का नाम....

आंसू है वो दर्पण जिसमें रूप मैया का बसता,

ऐसे रोने से माँ मिल जाये तो जानो सस्ता,

कितने दुर्लभ माँ के दर्शन कितने सस्ते दाम,

क्यों नही रीझेगी मेरी माँ,

क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

आँखो में हो आंसू और होठों पे मां का नाम.....

रोने से जग हसँता है पर रो देना आसान नही,

दीन बन्धु माँ करुणां सिन्धु कर देगी पहचान सही,

भक्त वक्तसला शरणागत भज ले सुबह शाम,

क्यों नही रीझेगी मेरी माँ,

क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

आँखो में हो आंसू और होठों पे मां का नाम.....

वो आसू भी क्या आंसू जो जग के लिए बहाये,

माँ की याद में बहे जो आंसू बहाये वो आंसू कहलाये,

ऐसे ही ईक आंसू पर वो दौड़ी आयेगी माँ,

क्यों नही रीझेगी मेरी माँ,

क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

आँखो में हो आंसू और होठों पे मां का नाम.....

आँखो में हो आंसू और होठों पे माँ का नाम,

क्यों नही रीझेगीे मेरी माँ क्यों नही मानेगी मेरी माँ,

करो भरोसा माँ पे बन जायेगें तेरे बिगड़े काम,

क्यों नही रीझेगी मेरी माँ क्यों नही मानेगी मेरी माँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।