मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी,

मैं अज सारी रात नचना,

माँ ने फड़ लयी ऐ बांह अज मेरी

मैं सारिया नू अज दसना

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी

मैं अज सारी रात नचना...

सिर उते चुनरी माँ लेके तेरे नाम दी,

बन के मैं कमली भजन तेरी गावदी,

बन के मैं कमली भजन तेरी गावदी,

जो भी केहन्दी ऐ कहे दुनिया सारी,

मैं अज न हटया हटना,

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी,

मैं अज सारी रात नचना,

माँ ने फड़ लयी ऐ बांह अज मेरी,

मैं सारिया न अज दसना...

मैं वि मैया तेरे नाम विच रंगना,

तेरे कोलो माये अज तैनू ही मैं मंगना,

तेरे कोलो माये अज तैनू ही मैं मंगना,

मैनु चढ़ गई ऐ नाम गई खुमारी,

मैं बिना तेरे नाहियो बचना,

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी,

मैं अज सारी रात नचना,

माँ ने फड़ लयी ऐ बांह अज मेरी,

मैं सारिया न अज दसना...

ध्यानु ने ध्यान तेरे चरना च लाया माँ,

श्रीधर ने भी तेरा दर्शन पाया माँ,

श्रीधर ने भी तेरा दर्शन पाया माँ,

जग पूज दा ऐ तेनु माँ भवानी,

मैं सदा तेरा नाम जपना,

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी,

मैं अज सारी रात नचना,

माँ ने फड़ लयी ऐ बांह अज मेरी,

मैं सारिया न अज दसना...

दर मैया दे नचना गाऊनां,

नच नच के मैं माँ नू मनाऊनां,

नच नच के मैं माँ नू मनाऊनां,

माँ दे चरणा तो जावां बलिहारी,

तू सदा मेरी लाज रखना,

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी,

मैं अज सारी रात नचना,

माँ ने फड़ लयी ऐ बांह अज मेरी,

मैं सारिया न अज दसना...

मैं ता बनके दीवानी मैया तेरी,

मैं अज सारी रात नचना,

मैं अज सारी रात नचना,

मैं अज सारी रात नचना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।