मेरा अवगुण भरा शरीर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे,

मै हुँ इसीलिऐ दिल्लगीर,

मै हुँ इसीलिऐ दिल्लगीर मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे.......

ना पूजा ना पाठ समाधी,

जन्म जन्म का हुँ अपराधी,

मै हुँ त्रुटीयो की तस्वीर मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे.....

ध्यानु जैसी प्रीत ना कीनी,

चरणन भेंट शीश ना दीनी,

मेरे नैनां भरेयो अब नी मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे......

श्रीधर जैसी भक्ती नही है,

तुझ से मिलन की शक्ति नही है,

मेरी क्षमा करो तकदीर मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे......

भवसागर मे कूद पड़ा हुँ,

दुनियादारी मे जकड़ा हुँ,

मेरे पाँव पड़ी जंजीर मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे......

बार बार आने जाने में,

जन्मो के ताने बाने में,

मेरी उलझ गई तकदीर मैया जी कैसे तारोगे,

मेरा अवगुण भरा शरीर मैया जी कैसे तारोगे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।