तेरे प्यार दी खुशबू माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे प्यार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

दरबार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

कोई कड वि नहीं सकदा मेरी रूह विच वस गयी ऐ,

तेरे प्यार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ......

जदो दिल मेरा घबरान्दा तेरी खुशबू आ जांदी,

जदो दिल मेरा घबरान्दा तेरी खुशबू आ जांदी,

तेरे कोल माँ होने दा एहसास करा जांदी,

मैं तेरे कोल ही हाँ, माँ आ के दस गयी ऐ,

तेरे प्यार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ......

माँ दे चरना नू छूके इक झोंका आया ऐ,

माँ दे चरना न छू के इक झोंका आया ऐ,

बच्या घबराई ना मेरी माँ ने सुनाया ऐ,

मैं क्यों डगमग डोला, मैनु मैया मिल गयी ऐ,

तेरे प्यार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ.....

जद खुशबू आ जांदी मैनु मस्त बना जांदी,

जद खुशबू आ जांदी मन मस्त बना जांदी,

माँ दी खुशबु आ जावे सारी दुनिया भूल जांदी,

कोई नशा नहीं चड़दा, मैनु मस्ती चढ़ गयी ए,

तेरे प्यार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

दरबार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

तेरे प्यार दी खुशबू माँ मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

मेरे दिल विच वस गयी ऐ,

मेरे दिल विच वस गयी ऐ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।