किते डुब ना जावा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

किते डुब ना जावा माँ बड़ी दुर किनारा ऐ,

झण्डेयावाली हुण ता बस ईक तेरा सहारा ऐ,

किते डुब ना जावा माँ बड़ी दुर किनारा ऐ...

हर वेले मैनु तकने पैन्दे उदासीया वाले पल माँ,

वड्डी तो वड्डी मुश्किल दा तेरे कोल ही हल माँ,

रो रो के अँखा मेरिया सुकीया, वेला माडा ऐ

किते डुब ना जावा माँ बड़ी दुर किनारा ऐ...

जदो आके मात भवानी दुखा ने मैनु घेर लया,

अपने पराया सबने रलके मेत्थो मुंह माँ फेर लया,

धुपा दे सेका विच रहके, नईओ गुजारा ऐ,

किते डुब ना जावा माँ बड़ी दुर किनारा ऐ...

तेरे ते भरोसा माईऐ तेरे ते ही आस ऐ,

नैया तुईओ पार करेगी, पक्का माँ विश्वास ऐ,

भगता ने तैनु अपने दिल दा हाल दस्सेया सारा ऐ,

किते डुब ना जावा माँ बड़ी दुर किनारा ऐ...

समझ ना आन्दा महारानीऐ कैसे मेरे नसीब ने,

खोल छड्ड ताले नसीबा वाले आके ऐस गरीब दे,

मंदे नसीबां वाला सिर ते भार माँ भारा ऐ,

किते डुब ना जावा माँ बड़ी दुर किनारा ऐ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।