मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की,

तेरा पाने शेरांवालीये दीदार आ गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की,

तेरा पाने शेरांवालीये दीदार आ गई,

दीदार आ गई, दीदार आ गई,

दीदार आ गई, दीदार आ गई,

मैं तो हो गई, मैं तो हो गई, मैं तो हो गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की......

चोला चुनरी लाल ले आई,

चूड़ा मेहंदी नाल ले आई,

चोला चुनरी लाल ले आई,

चूड़ा मेहंदी नाल ले आई,

हत्थी गूंद गूंद के फुलां नु महारानीये,

तेरे दर ते चढ़ाउन नु मैं हार आ गई,

हार आ गई मायें हार आ गई,

हार आ गई मायें हार आ गई,

मैं तो हो गई, मैं तो हो गई, मैं तो हो गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की......

नाम अनेकां तेरे मैया,

पार करे तू सबकी नैया,

नाम अनेकां तेरे मैया,

पार करे तू सबकी नैया,

तेरे वरगा ना जग विच वेखेया,

धककी पाल पाल सारा संसार आ गई,

संसार आ गई, संसार आ गई,

संसार आ गई, संसार आ गई,

मैं तो हो गई, मैं तो हो गई, मैं तो हो गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की.....

बाँवरी होई कमली होई,

बाँवरी होई कमली होई,

याद तेरी विच पल पल रोई,

रह नही सकदी मैं तेरे बिना दातिये,

रह नही सकदी मैं तेरे बिना दातिये,

जग छड़ के मै तेरे दरबार आ गई,

दरबार आ गई दरबार आ गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की,

तेरा पाने शेरांवालीये दीदार आ गई.....

दास तेरे माँ एहो मंगदे,

दास तेरे माँ एहो मंगदे,

साणु नाम दे रंग विच रंग दे,

साणु नाम दे रंग विच रंग दे,

भरे दातिये तू सब ना दी झोलिया,

लैन सूखा वाला मैं वी भंडार आ गई,

भंडार आ गई भंडार आ गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की,

तेरा पाने शेरांवालीये दीदार आ गई,

दीदार आ गई, दीदार आ गई,

दीदार आ गई, दीदार आ गई,

मैं तो हो गई, मैं तो हो गई, मैं तो हो गई,

मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।