क्या कहना वाह क्या कहना

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

धुन- अफ़साना लिख रही हूँ

( नासै रोग हरै सब पीरा,

जप निरंतर हनुंमत बीरा ll

संकट ते हनुंमान छुड़ावै,

मन कर्म वचन ध्यान जो लावै ll )

संकट कटै मिटै सब पीरा,

जो सुमिरै हनुंमत बलबीरा ll )

बोलो बाला जी महाँराज की,,,,,, जय l

क्या कहना वाह क्या कहना xll,

बाला जी सरकार का,

वस गया है, जलवा दिल में, तेरे दरबार का l

क्या कहना वाह क्या कहना xll -ll

इस मंदिर जैसा और नहीं, "पूरे संसार में" l

हर अर्ज़ी होती पूरी, "यहाँ पहली बार में" ll

रखते ख्याल बाला जी ll

हर सेवादार का,

वस गया है, जलवा दिल में, तेरे दरबार का,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

झुकते हैं रोज़ हज़ारों, ''मेहंदीपुर धाम में'' l

है अगम अगोचर शक्ति, ''सालासर धाम में'' ll

भूतों और प्रेतों को भी ll

डर इनकी मार का,

वस गया है, जलवा दिल में, तेरे दरबार का,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस धाम की मिटटी भी, "पावन पुनीत है" l

यहाँ रहते बाला जी के, "हर ज़ुबान पे गीत हैं" ll

संकट हरते बाला जी ll

भक्तों के परिवार का,

वस गया है, जलवा दिल में, तेरे दरबार का,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

यहाँ आकर दिल को धीरज, "मिलता अपार है" l

जो है इनका दीवाना, "यह उनका विचार है" l

कल्याण करे बाला जी ll

पूरे परिवार का,

वस गया है, जलवा दिल में, तेरे दरबार का,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,

क्या कहना वाह क्या कहना,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

धुन- जय जय राम,,, xlll, जय सिया राम llll

जय जय राम राम राम xlll, जय जय सिया राम llll

जय जय राम,,, xlll, जय सिया राम ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।