गोकुल में जन्मे साँवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( आनन्द मगन गदगद बदन कृष्ण भाव के रंग,

जामे रंगीले सब स्वजन बाजत ढोल मृदंग।। )

गोकुल में जन्मे साँवरिया ।।03।।

सांवरिया रे सांवरिया ओ सांवरिया,

जेलन मे जन्मे सांवरिया,

गोकुल मे.....

मोर मुकुट सिर ऊपर साजे,

पीतांबर सब तन पर राजे,

ओ ओढ़े काली कांवरिया,

गोकुल मे.....

आगंन बीच डाल दओ पलना,

जापे मस्त झूल रहो ललना,

हो झूम रही ब्रज नगरिया,

गोकुल मे.....

आओ जन्माष्टमी मनाएं,

चलके मनमोहन को रिझाएं,

ओ लैके माखन की गागरिया,

गोकुल मे.....

सांवरिया रे सांवरिया ओ सांवरिया,

जेलन मे जन्मे सांवरिया,

गोकुल मे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।