मैं अब छोड़ कर सारे दुनिया के धन्धे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं अब छोड़ कर सारे दुनिया के धन्धे,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं,

बिना ज्ञान के हो गये कर्म काले,

मै करने को शुद्धिकरण आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

तेरा अशं हुं मैं तुम्ही से हुं बिछङा,

पुःन करने एकीकरण आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

मै हूं पाप का पुन्ज तुम से चोरासी,

मैं पापो का करने दहन आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

गगन चूमते ऊंचे पर्वत तुम्हारे,

मैं चढ़ कर चढा़ईया कठिन आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

तेरे नाम की सारी दुनिया में चर्चा,

तेरा नाम करने स्मरण सा आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

तुम्हारा चरणजल ह्रदयतम को हरता,

मैं करने मधुर आचमन आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

कई जन्म पाए कई योनियों से,

खत्म करने आवागमन आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

बङा है घमण्डी रहा सर ये ऊँचा,

मैं करने को सर को नमन आ गया हुं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

अब छोङ दी प्रीत प्रीतम ने जग से,

मैं तुझसे लगाने लगाने आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

मैं अब छोड़ कर सारे दुनिया के धन्धे,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं,

बिना ज्ञान के हो गये कर्म काले,

मै करने को शुद्धिकरण आ गया हूं,

तुम्हारी भवानी शरण आ गया हूं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।