सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए,

सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए......

असी कख सी गलियां दे तुसा गल नाल लाया ए,

जिस नाम तो बिछड़े सी ओ नाम मिलाया ए,

मेरी माँ दा जो दर मिलेया ओ पाग निशानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए,

सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए.....

साडे हुकुम नु मन लैना ए सच्ची भक्ति ए,

तुहाडी मौज दे विच रहना ए सच्ची मस्ती ए,

बिना कृपा दा होये ना र रस्म पुरानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए,

सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए......

सच बोल के सच कहना असी कदे ना डोलांगे,

सच पीछे मर जाना जयकारे बोलांगे,

उस ज्योत विचो ज्योत निकले ओ ज्योत नूरानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए,

सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए.....

सेवा सुमिरण करके असा उम्र बितानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए,

तुहाडी बनी रहे कृपा असा तोड़ निभानी ए........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।