भोला अखिया ना खोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कैसी समाधी लगाई रे भोला अखिया ना खोले

अखिया ना खोले भोला अखिया ना खोले

गंगा भी बोले यमुना बोले

नंदी ने लहर बड़ाई रे भोला अखिया ना खोले

कैसी समाधी.....

राम भी बोले श्याम भी बोले

श्याम ने बंसी बजायी रे भोला अखिया ना खोले

कैसी समाधी......

ब्रह्मा भी बोले विष्णु भी बोले

नारद ने वीणा बजायी रे भोला अखिया ना खोले

कैसी समाधी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।