माँ देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ,

माँ देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ,

मेरे सिर पर रख दो मैया अपनी दया का हाथ,

माँ देना हो तो दीजिए......

इस जन्म में सेवा दे कर बहुत बङा अहसान किया,

माँ बहुत बङा अहसान किया, माँ बहुत बङा अहसान किया

तू है अम्बे तू है काली माँ हमने तुझे पहचान लिया,

माँ हमने तुझे पहचान लिया, माँ हमने तुझे पहचान लिया

जन्म जन्म तक साथ रहोगी..

जन्म जन्म तक साथ रहोगी रख लो हमारी बात,

माँ देना हो तो दीजिए.......

माँ तेरे चरणों की धूली धन दौलत से प्यारी है,

धन दौलत से प्यारी है, माँ धन दौलत से प्यारी है,

एक नजर कृपा की दाती इज्जत शान हमारी है,

इज्जत शान हमारी है, माँ इज्जत शान हमारी है,

मेरे जीवन में माँ कर दो..

मेरे जीवन में माँ कर दो अब कृपा की बरसात,

माँ देना हो तो दीजिए.......

हमने सुना है तू शरणागत अपने गले लगाती हो,

माँ अपने गले लगाती हो, माँ अपने गले लगाती हो,

ऐसा हमने क्या मांगा है जो देने से घबराती है,

जो देने से घबराती है, जो देने से घबराती है,

मेरे दिल की यही तमन्ना...

मेरे दिल की यही तमन्ना तेरी सेवा करु दिन रात,

माँ देना हो तो दीजिए.......

झुलस रहे गम के राह पर प्यार की छैया कर दे तू,

प्यार की छैया कर दे तू, माँ प्यार की छैया कर दे तू,

बिन पाती के चले नाव अब पतवार पकड़ ले तू,

अब पतवार पकड़ ले तू, माँ अब पतवार पकड़ ले तू,

मेरा रस्ता रोशन कर दो...

मेरा रस्ता रोशन कर दो माँ छाई अन्धेरी रात,

माँ देना हो तो दीजिए......

माँ देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ,

माँ देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ,

मेरे सिर पर रख दो मैया अपनी दया का हाथ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।