काली मेरी माई कालका काली मेरी माई

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई,

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई,

पापी देखण थर थर कंबण,

पापी देखण थर थर कंबण पाउंदे हाल धुआई

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई....

हत्थ खंडा त्रिशूल विराजे,

गल रून्दन दी माला साजे,

माला साजे, माला साजे,

माला साजे, माला साजे,

चण्ड मुंड नु चुन चुन मारे,

चण्ड मुंड नु चुन चुन मारे, चामुण्डा कहलाई,

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई....

खंडा माँ दा रुकदा नही सी,

किसे दे अगे झुकदा नही सी,

झुकदा नही सी, झुकदा नही सी,

झुकदा नही सी, झुकदा नही सी,

देवी देवते इक्कठे होके,

देवी देवते इक्कठे होके, शिवा नु अर्ज सुनाई,

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई....

चाँद तेरे गुण गावे मैया,

चरणी शीश झुकावे मैया,

झुकावे मैया, झुकावे मैया,

झुकावे मैया, झुकावे मैया,

भगत गुण तेरे गाउँदा,

भगत गुण तेरे गाउँदा, दे दर्शन महामाई

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई,

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई,

पापी देखण थर थर कंबण,

पापी देखण थर थर कंबण पाउंदे हाल धुआई

काली मेरी माई कालका काली मेरी माई....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।