दर्शन दे दो एक बार माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

धुन- तुझको पुकारे तेरा प्यार आजा

दर्शन दे दो, एक बार, माँ,,,दर्शन दे दो, एक बार l

मईया,,, तुझको पुकारे, तेरा लाल माँ,

दर्शन दे दो, एक बार।

नादान हूँ मैं, कैसे मनाऊँ तुझको, समझ ना आए l

क्या मैं करूँ जो, ऊँचे पहाड़ों से तूँ, दौड़ी चली आए l

हो जाए मेरा भी उद्धार,,,

मईया,,, तुझको पुकारे, तेरा लाल माँ,

दर्शन दे दो, एक बार।

सब जानती हो, क्या चाहता हूँ मैं, कह ना सकूँगा l

इतना समझ लो, तेरे बिना मैं मईया, रह ना सकूँगा l

कब तक करूँ मैं इन्तजार,,,

मईया,,, तुझको पुकारे, तेरा लाल माँ,

दर्शन दे दो, एक बार।

मैंने ना देखे, जीवन में अपने कभी, दो पल ख़ुशी के l

दो कट गए हैं, दो ही बचे हैं दिन, इस जिंदगी के l

अब तो दिखा दो दीदार,,,

मईया,,, तुझको पुकारे, तेरा लाल माँ,

दर्शन दे दो, एक बार।

"विशाल" ठोकर, क्यों खा रहा है मईया, इतना बताओं l

अंधियारी राहें, किस्मत है सोइ क्यों माँ, इसको जगाओ l

दे दो सहारा एक बार,,,

मईया,, तुझको पुकारे, तेरा लाल माँ,

दर्शन दे दो, माँ एक बार l

दर्शन दे दो, माँ एक बार माँ lll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।