चुनरियाँ अनमोल

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चुनरियाँ... चुनरियाँ अनमोल,

तेरी माँ चुनरियाँ,

हीरे मोती तरह तरह के जड़े है प्यारे प्यारे,

चमक रहे है चम चम जैसे चाँद सितारे,

चुनरियाँ... चुनरियाँ अनमोल,

तेरी माँ चुनरियाँ।।

पहले सिरे पर गणपती बैठे,

चूहे की अस्वारी,

दुजे सिर पे गौरा के संग,

बैठे शिव त्रिपुरारी,

ओ तीजे सिरे पे सीता के संग,

बैठे अवध दुलारे,

चौथे सिरे पे राधा के संग,

बैठे बंसी वाले,

चुनरियाँ... चुनरियाँ अनमोल,

तेरी माँ चुनरियाँ।।

हरे रूए में ॐ लिखा है,

ममता के है धागे,

इंद्रपूरी की सारी वसुधा,

फीकी इसके आगे,

ओ गंगा जमुना कल कल बहती,

चारो और किनारे,

काम क्रोध मद लोभ के लख बने है द्वारे,

चुनरियाँ... चुनरियाँ अनमोल,

तेरी माँ चुनरियाँ।।

बेला चम्पा और गुलाब की,

गुथी हुई फुलवारी,

दिल को मोहित करने वाली,

गौटा जड़ी किनारी,

वेदों और पुराणों के भी मंत्र लिखे है सारे,

कहे ‘परवीन’ तन मन इस पे वारे,

चुनरियाँ... चुनरियाँ अनमोल,

तेरी माँ चुनरियाँ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।