शृंगार तेरा प्यारा लगे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी शेरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

मेरी ज्योतावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे मेहरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे।।

प्यारा मुकुट तेरे शीश पे साजे,

शीश पे साजे, शीश पे साजे,

हीरे मोती की लगे चमकार,

शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे शेरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे ज्योतावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे मेहरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे।।

मस्तक पे लाल है बिंदिया साजे,

बिंदिया साजे, बिंदिया साजे,

सुंदर फूलों के डाले गले हार,

शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे शेरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे ज्योतावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे मेहरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे।।

हाथों पे तेरे चूड़ियां साजे,

चूड़ियां साजे, कंगना साजे,

तेरी पूजा करे संसार,

शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे शेरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे ज्योतावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे,

हे मेहरावाली माँ, शृंगार तेरा प्यारा लगे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।