शंकर का डमरू बाजे रे

मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शंकर का डमरू बाजे रे,

कैलाशपति शिव नाचे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे......

जटा जूट में नाचे गंगा,

शिव मस्तक पे नाचे चंदा,

नाचे वासुकी नीलकंठ पर,

नागेश्वर गल साजे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे.....

शीश मुकुट सोहे अति ही सुंदर,

नाच रहे कानों में कुंडल,

कंगन नूपर चरम ओडनी,

भस्म दिगंबर साजे ये,

शंकर का डमरू बाजे रे.....

कर त्रिशूल कमंडल साजे,

धनुष बाण कंधे पर नाचे,

बजे ''मधुप'' मृदंग ढोल ढप,

शंख नगाड़ा बाजे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।