मेरा रूठे ना गणपत प्यारा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मेरा रूठे ना गणपत प्यारा,

चाहे सारा जग रूठे।।

मैं हु तेरी तू है मेरा,

हो जाये तुमसे प्यार घनेरा,

है तेरे बिना अँधियारा,

चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना गणपत प्यारा,

चाहे सारा जग रूठे।।

मन मंदिर में ज्योत जगादे,

मुझमे अपना प्रेम बड़ादे,

तेरे प्रेम ने सबको तारा,

चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना गणपत प्यारा,

चाहे सारा जग रूठे।।

तेरे बिना मैं जी ना पाऊ,

तेरे चरणों में रहना चाहु,

अब तू ही सिर्फ हमारा,

चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना गणपत प्यारा,

चाहे सारा जग रूठे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।