कभी मईया के मंदिर में गया ही नहीं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कभी मईया के मंदिर में गया ही नहीं,

फिर भक्त कहलाने से क्या फायदा,

माँ का ध्यान कभी लगाया नहीं,

सिर्फ दीपक जलाने से क्या फायदा।

लाख माथे पे अपने तू चंदन लगा,

बिना पूजा कुम कुम के टिका लगा,

गुणगान कभी माँ का किया ही नहीं,

उपदेश सुनाने से क्या फायदा,

कभी मईया के मंदिर में गया ही नहीं,

फिर भक्त कहलाने से क्या फायदा।

रोज़ तन को तो पानी से धोया मगर,

मन के मैल को अब तक मिटाया नहीं,

सच्चा प्रेम अपने दिल में बसाया नहीं,

गंगाजल में नहाने से क्या फायदा,

कभी मईया के मंदिर में गया ही नहीं,

फिर भक्त कहलाने से क्या फायदा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।