संसार जिसने तारा है

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॥ पावन पाठ ॥

पवित्र जिसका नाम,

पावन जल की धारा है,

तारणहार तारण तरंगिनी,

संसार जिसने तारा है।

देवों ने महिमा है गाई,

वेदों ने उच्चारा है,

तारणहार तारण तरंगिनी,

संसार जिसने तारा है,

पवित्र जिसका नाम,

पावन जल की धारा है।

नमामी गंगे हर हर गंगे,

जिसने श्रद्धा से पुकारा है,

सुख संतोष का वर दिया,

उसे दुखों से सदा उबारा है,

तारणहार तारण तरंगिनी,

संसार जिसने तारा है,

पवित्र जिसका नाम,

पावन जल की धारा है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।