इस मन की भटकी हुए नाव को

अनूप जलोटा
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

इस मन की भटकी हुए नाव को, आज किनारा मिल गया,

राम मेरे मुझ पापी को भी तेरा सहारा मिल गया,

इस मन की भटकी हुए नाव को, आज किनारा मिल गया॥

उलझा हुआ था मैं माया के जंगल में तुमने बचाया मुझे

तुमने बचाया मुझे, तुमने बचाया मुझे,

औकात ना थी मेरी नाथ तुमने,

अपना बनाया मुझे, अपना बनाया मुझे,

तेरी कृपा से गंगा के जल में पानी ये खारा मिल गया,

इस मन की भटकी हुए नाव को, आज किनारा मिल गया॥

केहनो को तो चल रही थी ये साँसे बेजान थी आत्मा,

जन्मो की श्रापो का हाँ मेरे पापो का तुमने किया खत्मा,

तुमने छुआ तो तुम्हारा हुआ तो, जीवन दुबारा मिल गया,

इस मन की भटकी हुए नाव को, आज किनारा मिल गया॥

ना जाने कितने जनम और जलता मैं, तृष्णा की इस आग में,

काले सवेरे थे लिखे अँधेरे थे, शायद मेरे भाग में,

तुम आये ऐसे अंधेरों में जैसे, कोई सितारा मिल गया,

इस मन की भटकी हुए नाव को, आज किनारा मिल गया,

राम मेरे मुझ पापी को भी तेरा सहारा मिल गया,

इस मन की भटकी हुए नाव को, आज किनारा मिल गया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।