आए पैगंबर पूर्बो

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॥ पावन पाठ ॥

आए पैगंबर पूर्बो,

आए पैगंबर पूर्बो,

रहबर खुदा दे यार ने,

आए पैगंबर पूर्बो,

रहबर खुदा दे यार ने,

हर फिकर तों सुरखरू,

मौजां दे अस्वार ने,

आए पैगंबर पूर्बो।

जी करदे ईद मनौन नू,

उस महज़बीन नू देख के,

जी करदे एईद मनौन नू,

महज़बीन नू देख के,

नूवर-ए-इलाही हुस्न आज़ल,

अल्लाह दे रुखसार ने,

आए पैगंबर पूर्बो,

रहबर खुदा दे यार ने,

आए पैगंबर पूर्बो।

लफ्ज़-ओ-इनायत नाल ओ,

देंदे गमां तों नीज़ात ने,

लफ्ज़-ओ-इनायत नाल ओ,

देंदे गमां तों नीज़ात ने,

विच तपदे रेगिस्तान दे,

दरखत ओह सायेदार ने,

आए पैगंबर पूर्बो,

रहबर खुदा दे यार ने,

आए पैगंबर पूर्बो।

खैर ख्वाह हर एक दे,

निसबत है सब दे नाल कोई,

खैर ख्वाह हर एक दे,

निसबत है सब दे नाल कोई,

राज़दान कायनात दे,

हर दिल दे दिलदार ने,

आए पैगंबर पूर्बो,

रहबर खुदा दे यार ने,

आए पैगंबर पूर्बो।

अर्शां वरगी शान है,

होये नदर तां नज़री आवंदी,

अर्शां वरगी शान है,

होये नदर तां नज़री आवंदी,

ख्वाबन दी तबीर ने,

तसवउर-ए-निगार ने,

आए पैगंबर पूर्बो,

रहबर खुदा दे यार ने,

आए पैगंबर पूर्बो।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।