आर नानक पार नानक

पारंपरिक
शनि देव भजन विविध भजन shani
॥ पावन पाठ ॥

धरती धन होई धन होए अम्बर,

सभे दुख मुके सच्चे पातिशाह जी,

हथ बन्हदे आं मत्था टेकदे आं,

तुसीं आण ढुके सच्चे पातिशाह जी,

हेठाँ चानण दा दरिया वगे,

उतों मेहर दा वरसे मेघ बाबा,

जिन्हाँ थावां ते पाए पैर तुसीं,

उथे अज वी वरते देग बाबा,

आर नानक पार नानक, सभ थाँ एक ओंकार नानक,

आर नानक पार नानक, सब थाँ एक ओंकार नानक।

तूँ नूर दा फुटदा चश्मा ऐं,

तू रोशनियाँ दी रेखा ऐं,

इक तेरा ही दरबार सच्चा,

बाकी सब भरम भूलेखा ऐ,

तेरा शब्द सुणाँ वैराग होवे,

तन मन दे बदलण वेग बाबा,

आर नानक पार नानक, सभ थाँ एक ओंकार नानक,

आर नानक पार नानक, सब थाँ एक ओंकार नानक।

तेरे रूप जिहा कोई रूप नहीं,

तेरी दीद जेहा प्रसाद नहीं,

तेरे बँके लोएण दंत रसाला,

सोहणे नक जिन लमड़े वाला,

कँचन काया सुएने की ढाला,

तेरे रूप जिहा कोई रूप नहीं,

तेरी दीद जेहा प्रसाद नहीं,

सरबत दा भला सिखाया तूँ,

कोई घाट नहीं कोई वाध नहीं,

तूँ केंद्र बिन्दु ब्रह्मंड दा,

तू सिरजी सारी खेड बाबा,

जदों पाया दसवां जामा तूँ,

हत्थाँ विच फड़ लई तेग बाबा,

आर नानक पार नानक, सभ थाँ एक ओंकार नानक,

आर नानक पार नानक, सब थाँ एक ओंकार नानक........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।