सतगुरु दाता दयाल है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु दाता दयाल है,

जिस नु दया सदा होये,

सतगुरु दाता दयाल है ।

सतगुरु अंधरों निरवैर है, सब देखै भ्रम इक सोये,

सतगुरु अंधरों निरवैर है, सब देखै भ्रम इक सोये,

सतगुरु दाता दयाल है, जिस नु दया सदा होये।

निर्वैरां नाल जे वैर चलायेंदे, तिन विचों तिसटेया न कोये,

निर्वैरां नाल जे वैर चलायेंदे, तिन विचों तिसटेया न कोये,

सतगुरु दाता दयाल है, जिस नु दया सदा होये।

सतगुरु सभना दा भला मनायेदा, तिस दा बुरा क्यों होये,

सतगुरु सभना दा भला मनायेदा, तिस दा बुरा क्यों होये,

सतगुरु दाता दयाल है, जिस नु दया सदा होये।

सतगुरु नु जेहा को इछदा, तेहा फल पाए कोये,

सतगुरु नु जेहा को इछदा, तेहा फल पाए कोये,

सतगुरु दाता दयाल है, जिस नु दया सदा होये।

नानक करता सब किछ जाणदा, जीदु किछ गुजा न होये,

नानक करता सब किछ जाणदा, जीदु किछ गुजा न होये,

सतगुरु दाता दयाल है, जिस नु दया सदा होये,

सतगुरु दाता दयाल है, सतगुरु दाता दयाल है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।