गुरु मेरे जान प्राण

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु मेरे जान प्राण, शब्द का दीना दाना,

शब्द मेरा आधार, शब्द का मरम पछाना।

क्या गुण गाउँ शब्द , शब्द का अगम ठिकाना,

बिना शब्द सब जीव, धुंध में फिरें भरमाना।

जल पाछान पूजत रहें, कागज अटकाना,

मनमत ठोकर खाये, गए चौरासी खाना,

गुरु मेरे जान प्राण, शब्द का दीना दाना,

शब्द मेरा आधार, शब्द का मरम पछाना।

बहु बिधि विपता जीव को, बिन शब्द सुनाना,

सतगुरु की सेवा बिना, नहीं लगे ठिकाना।

शब्द भेद बिन सतगुरु, क्या कहे अजाना,

मन इंद्री बस में नहीं, तो काल चबाना,

गुरु मेरे जान प्राण, शब्द का दीना दाना,

शब्द मेरा आधार, शब्द का मरम पछाना।

राधास्वामी सरन ले, सब भाँती बचाना,

मेहर दया छिन में करें, दें अगम खजाना,

गुरु मेरे जान परान, शब्द का दीना दाना,

शब्द मेरा आधार, शब्द का मरम पछाना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।