श्याम ना जगे जगाए से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सोए गए कुंभकरण की नींद,

श्याम ना जगे जगाए से,

श्याम ना जगे जगाए से,

सोए गए कुंभकरण की नींद,

श्याम ना जगे जगाए से॥

श्याम को मीरा टेर रही रे,

बाट प्याले में देख रही रे,

तुमने कहां लगा दी देर,

अमृत बने ना बनाए से,

सोए गए कुंभकरण की नींद,

श्याम ना जगे जगाए से॥

श्याम को नरसी टेर रहे रे,

डाल दिए जूनागढ़ डेरा रे,

तुमने कहां लगा दी देर,

बात ना भरे भराए से,

सोए गए कुंभकरण की नींद,

श्याम ना जगे जगाए से॥

श्याम को हरिचंद टेर रहे रे,

बात पनघट पर देख रहे रे,

तुमने कहा लगा दी देर,

घड़ा ना उठे उठाये से,

सोए गए कुंभकरण की नींद,

श्याम ना जगे जगाए से॥

श्याम को मोरध्वज टेर रहे रे,

बाट आरे में देख रहे रे,

तुमने कहां लग दई देर,

लाल ना बचे बचाए से,

सोए गए कुंभकरण की नींद,

श्याम ना जगे जगाए से॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।