मईया का मंदिर सुहाना लगता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया का मंदिर सुहाना लगता है,

अंधियारे में भी उजाला लगता है………..

ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर चल कर आई मां,

तेरे लिए प्यारी प्यारी बिंदिया लाइ मां,

हाथों से लगाना अच्छा लगता है,

अंधियारे में भी उजाला लगता है,

मैया का मंदिर सुहाना लगता है

अंधियारे में भी उजाला लगता है………..

ऊंचे ऊंचे पर्वत पर में चढ़कर आई मां,

तेरे लिए प्यारा प्यारा टीका लाई मां,

हाथों से पहनाना अच्छा लगता है,

अंधियारे में भी उजाला लगता है,

मैया का मंदिर सुहाना लगता है

अंधियारे में भी उजाला लगता है………..

ऊंचे ऊंचे पर्वत पर में चढ़कर आई मां,

तेरे लिए प्यारी प्यारी झुमकी हरवा लायी माँ,

तेरे लिए प्यारी प्यारी चूड़ियां, पायल, बिछिया, महावर, मेहंदी, चुनरी, लायी माँ,

हाथों से पहनाना अच्छा लगता है,

अंधियारे में भी उजाला लगता है,

मैया का मंदिर सुहाना लगता है

अंधियारे में भी उजाला लगता है………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।